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प्रश्नोत्तर P9-0192 · भाग 9

एक ने लिखा है कि ईमानदार होना दुनिया का सबसे कठिन काम है। गृहस्थ में तो और मुश्किल लगता है। ईमानदार बनते समय नीचे की सारी चीजें हिलेंगी, एक बार झटका लगेगा, दाल-रोटी और सूखी रोटी तक आना पड़ सकता है। आप योगी और तपस्वी हो, गृहस्थ नहीं बसाया। फिर भी आप कहते हो ईमानदारी सबसे सरल है?

और मेरा कहना है कि बेईमान होना दुनिया का सबसे कठिन काम है। ईमानदार होना, उसमें तो मेहनत करना ही नहीं है। वह स्वभाव है। अगर मैं यह करूं कि भैया, चाहे नमक-रोटी भी न मिले। अगर मुझे निकलना है, अगर मैंने तय कर लिया, क्योंकि वे तंग दिन आने ही वाले हैं। इस संसार में जिस रूप से हमने अपने आप को ढाल लिया है, जिस दौड़ में संसार चल रहा है, हमने भी उसी लय में अपने आप को जोड़ लिया है। अगर हम उस लय से अलग होंगे, तो या तो फिर सब कुछ छोड़ के इसी मार्ग में, कि भैया अब मुझे निकलना है, तो ईमानदारी हो ही जाएगी। लेकिन अगर उसी भेड़चाल में करना है तो वहां तो बहुत मुश्किल। और वहां यह तैयार रखो भैया, नमक-रोटी मिलेगी ईमानदारी से तो खा लेंगे। लेकिन सोचो कि बारिश आ रही है, पकौड़े खा लेंगे, वह नहीं खा पाओगे। यहां सिर्फ बात यह है कि ईमानदार होना कठिन है या नहीं। तो मेरा कहना है, कठिन है ही नहीं। स्थिति-परिस्थिति तो आपके कर्म के ऊपर है। क्योंकि ईमानदार व्यक्ति भी छप्पन प्रकार का भोजन करता है। लेकिन वह तो अपनी योग्यता के अनुसार। मेरा यह कहना है कि दुनिया का सबसे सरल कार्य अगर कुछ है इस दुनिया में, तो ईमानदार होना। और दुनिया में सबसे कठिन कार्य है तो बेईमान होना। बस यह कहना है। बसाया तो मैंने भी नहीं गृहस्थी। संसार नहीं बसाया। तो काम तो मैंने भी किया, यह दिख रहा है। जैसे गृहस्थ में भी आपका कोई फायदा लेता है, तभी आपको पेमेंट करता है। वैसे मेरा अगर किसी ने फायदा लिया, मेरे काम का, तो उसने मुझे पेमेंट किया है। काम तो मैंने भी किया है। यह काम का ही परिणाम है। मेरे काम को देखकर, और काम का उपयोग करके, लोगों ने मुझे यह सहयोग दिया है। मुझे देखकर नहीं। टारगेट तो मेरा भी था। मैंने बोला था, वह टारगेट पूरा हो रहा है। मेरा तो सिर्फ इतना कहना है। मेरा अनुभव कह रहा हूं। आप जहां हो, वहां से भी कह रहा हूं, क्योंकि मैं वहां से कभी आया हूं, यहां तक। तो मैं वहां से भी, यहां से भी यही कहना चाहता हूं कि दुनिया का सबसे सरल कार्य है ईमानदारी, और सबसे कठिन कार्य है बेईमानी। वह तो कहां आ जाएगा, वह बात अलग है। लेकिन ईमानदारी सरल है। वह तो मेरा नैचुरल है। वही, सबसे कठिन अगर कुछ है तो बेईमानी।

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वीडियो: लाइव सत्संग अपनों की कुटिया में प्रश्न और उत्तर #योगी · 2026-07-16