शांति — योगी गुरु जी के प्रश्नोत्तर
इस पृष्ठ पर “शांति” विषय से जुड़े 32 प्रश्न हैं, जो जिज्ञासुओं ने सत्संग में योगी गुरु जी से पूछे। किसी प्रश्न पर क्लिक करके योगी गुरु जी का पूरा उत्तर उनके अपने शब्दों में पढ़ें, वीडियो के साथ।
- गुरु जी, ज्ञान, पवित्रता, प्रेम, शांति, सुख, आनंद और शक्ति — क्या ये आत्मा के कवच हैं? विस्तार से बताएं। (P2-0152)
- क्या मैं इसे ऐसे पैमाने की तरह समझ सकती हूं कि अगर मैं लक्ष्य की तरफ जा रही हूं तो शांति, उत्साह बढ़ेगा और निडर होती जाऊंगी; और लक्ष्य के विपरीत जा रही हूं तो घुटन, अशांति, असुरक्षा और डर बढ़ेगा? (P2-0195)
- अटैचमेंट छोड़े बिना अंदर नहीं जा पाते — अनुभव: देखना छोड़ो, चुप रहो, शांति; फिर भी डीप अटैचमेंट। (P3-0025)
- (कुटिया में साधक) मुझे लगता है जीवन की यात्रा अनंत से अनंत है और जीरो उसका सेंटर पॉइंट है (जिसे शांति या समाधि कहते हैं)। अच्छे कर्म करने वाला प्लस साइड — अच्छी जगह, अच्छी विचारधारा के लोगों में — जन्म लेता है; बुरे कर्म वाला माइनस साइड — दूसरी योनियों या वैसी विचारधारा के लोगों में — जाता है; ऐसे ही सर्कल घूमता रहता है। यह सर्कल टूटे कैसे? मुक्त हो गए तो फिर हम कहां होंगे — आत्मा कहीं तो होल्ड करेगी? और धरती पर 9-10 हजार करोड़ लोग जन्म ले चुके, अभी 900 करोड़ जिंदा हैं — बाकी की आत्माएं कहां गईं? (P3-0195)
- (लाइव) प्रणाम योगी जी। हम लोग बेजुबानों का एक ग्रुप पिछले छह साल से चला रहे हैं; अपनी तरफ से पूर्ण (100%) सेवा दे रहे हैं, पर जीवन में शांति नहीं मिलती। गलती कहां हो रही है? (P4-0013)
- (लाइव) प्रणाम योगी जी। क्या वास्तव में कोई ऐसी अवस्था है जहां दुख, बंधन और अज्ञान पूर्णतः समाप्त हो जाते हैं और केवल शांति, ज्ञान और आनंद ही शेष रहता है? (P4-0083)
- (हेम शर्मा) बचपन से भगवान में शांति; अब आस्था बाहर लगती है, अनुशासन कमजोर — क्या करूँ? (P5-0045)
- साधना में पहले लगा कि कोई बहुत ऊपर ले जा रहा है। फिर दो दिन एक साया दिखा। फिर ईसा मसीह स्पष्ट दिखे और देर तक प्रकाश देते रहे। असीम शांति हुई। सनातन, कुरान और गुरु ग्रंथ साहिब पढ़े हैं, ईसाई धर्म इस जन्म में नहीं पढ़ा। ईसा मसीह कैसे दर्शन दे गए? परिवार का कोई आ जाए तो क्या करूं? (P6-0106)
- बच्चों और बहुओं में तालमेल और शांति के लिए क्या करना चाहिए? बहू कह चुकी है कि पापा जी, इंदौर प्रोग्राम में जाने दो। घर में अभी फंक्शन भी है। (P7-0101)
- मैं स्थूल शरीर और अंतःकरण से शांतिपूर्वक ढंग से एक घंटा भी नहीं बैठ पाता। क्या करूं? (P8-0009)
- ज्ञान, पवित्रता, प्रेम, शांति, सुख, आनंद और शक्ति, क्या यह आत्मा का स्वभाव है? विस्तार से बोलिए। (P8-0090)
- गुरु जी, लोग शांति खोजते हैं या ईश्वर? ज्यादातर लोग क्या खोजते हैं? (P9-0038)
- वाक् सिद्धि होने पर पूरे जगत में सुख-शांति बनी रहे, ऐसा कोई कह दे, तो जानना चाहिए क्या? फिर कर्म? (P9-0117)
- गुरु जी, आत्मज्ञान होने के बाद क्या निर्दोषों की रक्षा की जा सकती है? एक वर्ग शांति से जीना चाहता है और दूसरा उसे परेशान कर रहा है। ऐसे में आत्मज्ञान कैसे होगा, और आततायी से निर्दोष की रक्षा कैसे होगी? (P9-0140)
- मेरे पास कुछ नहीं है। बस वह प्रेम और शांति है जो भीतर है। इसे बताकर क्या मिलेगा? (P10-0021)
- मेरी माताजी के स्वभाव के कारण मेरी, मेरे पिताजी की, भैया-भाभी की और बाकी सबकी शांति भंग होती है, डिप्रेशन होता है। क्या करें? (P12-0027)
- क्या शांति ही मूल है? (P12-0052)
- (एक साधक जो विपासना सेंटर भी जा चुके थे) गुरु जी, ध्यान को लगाया कैसे जाए, उसे कंटिन्यू कैसे रखा जाए? मैं दिमागी शांति के लिए ध्यान करना चाहता हूं। (P12-0143)
- मैंने कुंभ में कई महात्माओं के दर्शन किए, पर जो शांति होती है, वो अभी तक नहीं मिल पाई। जब मैं उस परमात्मा को कोई नाम देता हूं या कोई मंत्र देता हूं, तो मैं उसी में फंस जाता हूं — फिर सोचता हूं, नाम क्यों दिया, जरूरत ही क्या है? (P13-0059)
- ईमानदारी और सत्कर्म से आत्म-शांति तो आ ही जाएगी प्रभु? (P14-0200)
- क्या पितरों की शांति के बिना आत्मज्ञान और इष्ट के दर्शन हो सकते हैं? (P15-0036)
- आप जहाँ बैठे हैं वहाँ बहुत शांति प्रतीत हो रही है, अपार ऊर्जा है। (P15-0091)
- (लाइव) गुरु जी, आपकी ऊर्जा, जब हम लाइव देखते हैं, तब भी हम तक आती है? ऑनलाइन वीडियो देखकर भी बहुत शांति मिलती है। (P16-0166)
- योगी जी, मैं जो आपको देख रही हूं, सुन रही हूं, बोल रही हूं — इसे जीवात्मा समझूं — तो इस जीवात्मा को आखिर चाहिए क्या? जो चाहिए-चाहिए था वो देकर भी देखा, पर संतुष्टि नहीं, कहीं "द एंड पॉइंट" आता ही नहीं। मेरा हाल खुजली वाले रोगी जैसा है — खुजाने में मजा भी, फिर जलन भी। मंजिल दूर हो तो उसके पीछे भागती हूं, पास पहुंचते ही वो फीकी हो जाती है, और उसके चक्कर में कितने पाप कमाए, कितनों का दिल तोड़ा। अब थक गई हूं — बताइए मुझे क्या चाहिए, कहां पहुंचना है कि उसके बाद कोई दूसरा ऑप्शन न दिखे और परम शांति मिले? (P17-0009)
- गुरु जी, आप कैसे कहते हैं कि निर्विचार नहीं हुआ जा सकता? मैं जब चाहूं निर्विचार होकर शांति महसूस करता हूं। (P19-0037)
- गुरु जी, पश्चिम केवल कर्म करके अमीर है पर वहां परिवार और शांति नहीं, और यहां केवल नाम-जप में गरीबी आ रही है — बीच का रास्ता क्या है? (P20-0049)
- गुरु जी, शांति का मार्ग क्या है? (P22-0110)
- गुरु जी, एकांत में शांति से अपनी चटाई लेकर बैठते हैं; अभी तक तो हम ध्यान करते थे — अब ध्यान नहीं करना है, तो अब क्या करें? केवल चुपचाप बैठें? अपने आप में ही आनंद है, तो अपने आप को कैसे सोचें? (P23-0086)
- गुरु जी, जब माता-पिता के भीतर संतान के लिए प्रेम न होकर केवल धन का लालच और क्रोध रह जाए, तो अपनी मानसिक शांति के लिए उनसे दूरी बनाना सही है या गलत? (P23-0138)
- गुरु जी, शाश्वत शांति कहां और क्या है? (P23-0161)
- गुरु जी, बाप ने बेईमानी से कमा कर घर बनाया, तो उसमें शांति कैसे होगी — क्या ऐसा घर नेगेटिव एनर्जी देता है? (P25-0145)
- बाबा, आप वैराग्य को मना करते हैं, लेकिन मैं ऐसी जगह रहता हूं जहां हर रोज झगड़ा-फसाद होता है और मुझे शांति नहीं मिल पाती। मुझे मेरी शांति बहुत प्यारी है। इसमें मैं क्या करूं? (P25-0177)