आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रवचन PV02-0017 · भाग 2

तरीका हम लेकर पैदा होते हैं — जीवन में गधे मत बनो, और देखो साथ किसका है

15 जून 2026 · हर मोड़ पर बदलाव है, वही तो ज़िंदगी है

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मुख्य बातें

तरीका सब लेकर आते हैं

जितना भी आज मुझे देखिए, हमारे पास एक तरीका है — तरीका सब लेकर आते हैं। देखो, मानव के अलावा और भी जितने जीव हैं, उनको तैरना नहीं सिखाना पड़ता, वो तैर लेते हैं। कुत्ते, चींटी-चींटा देखो — पानी में जाते हैं, तैर के निकलने लगते हैं। तो ये तरीका यहां लेके पैदा होते हो।

बाकी बाहर से हमें लोग जानकारियां देते हैं, लेकिन उसका उपयोग हम अपने तरीके से करते हैं। सामने वाले ने हमें इस तरीके से सिखाया, उस तरीके से करने में हमने एक तरीका ढूंढ लिया। आप जैसा काम बताओगे, वैसा कोई नहीं करेगा — अपने तरीके से करेगा। जितनी जानकारियां हैं, आपको बाहर से मिलती हैं; एक तरीका आपको समाज सिखाता है; उस तरीके से काम करने में आप अपना तरीका पैदा कर देते हैं।

स्वभाव भी लेकर आते हैं

देखो, माता-पिता की हाइट आती है, चेहरा भी आता है — किसी का नाक मिलता है, किसी का गाल, किसी का होंठ, किसी की आंख। कुछ ना कुछ मिल ही जाता है। तो लेके ही आते हैं — स्वभाव भी।

परिवार में सबका स्वभाव अलग-अलग होता है। एक ही मां-बाप ने पाला, फिर भी एक बहुत सज्जन बनता है, एक बहुत बुरा इंसान बन जाता है। क्या आपको लगता है कि मां-बाप ने उसे बुरी शिक्षा दी होगी? नहीं — तरीका भी व्यक्ति लेकर पैदा होता है। इतिहास में देखो, हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को कितना सिखाया; प्रह्लाद तरीका लेकर पैदा हुए थे, बात ही नहीं माने — दुनिया तुमको भगवान मान ले, मैं मानूंगा ही नहीं। यहां सब तरीका लेकर पैदा होते हैं; जानकारी बाहर से मिलती है।

सीखने के बाद अपना तरीका

यहां सबकी बुद्धि की समझ अलग-अलग है, समझने की क्षमता अलग-अलग है। पहले तो आप सीखते हो, फिर अपने तरीके से करने लगते हो। बाल काटना सीखते वक्त सामने वाला कहता है — ऐसे नहीं, ऐसे करना; तो आप कहते हो, हां, ऐसे ही करूंगा — क्योंकि आपके पास जानकारी नहीं थी। लेकिन जब पूरी तरह सीख लिया, तो क्या उसी तरीके से काटते हो? जैसे ही उस फील्ड की जानकारी अच्छी हो जाती है, आप अपने अंदर से काम करने का नया तरीका पैदा करते हो।

जब आप प्रोफेसर हुए, तो अपने तरीके से पढ़ाया। क्या सब प्रोफेसर एक ही तरीके से पढ़ाते हैं? क्या सब वकील एक ही तरीके से काम करते हैं? विषय तो एक ही तरीके से पढ़ाया जा रहा था, शिक्षक ने कहा ऐसे-ऐसे करना है — लेकिन इस दुनिया में तरीका अपना-अपना होता है। बचपन में मां-बाप तो एक जैसी बात सिखाते हैं, लेकिन हर बच्चा उसे अपने तरीके से करता है।

जीवन में गधे मत बनो

जैसा तरीका बताया गया है, वैसा ही अगर कोई करेगा, तो वो समझदार नहीं होगा — वो समाज की या खुद की जिंदगी भी हरी-भरी नहीं कर सकता, जिंदगी में कुछ नहीं कर पाएगा। गधे को गधा क्यों कहा जाता है? उसमें खासियत है — उसे बांधा भी नहीं जाता; एक बार सामान लाद दो, दूसरी जगह ले जाएगा, बोझा उतरेगा तो फिर वापस आ जाएगा; आपको साथ जाने की जरूरत नहीं। सबसे मेहनती होता है, इसलिए उसे गधा कहा गया।

तो जीवन में गधे मत बनो, कि जितना बोला जाए उतना ही करना है। आप और अच्छे तरीके से कर सकते हो। और अगर आपको लग रहा है, तो सामने वाले को अपना तरीका बताओ ना कि आपसे अच्छा तरीका मेरे पास है — कह के तो देखो। और अगर वो करने ही नहीं दे रहा, तो ऐसे व्यक्ति का साथ छोड़ दो, क्योंकि वो आपका ग्रोथ नहीं होने देगा, आपकी समझ को विकसित नहीं होने देगा। जब आप कुछ नया करोगे नहीं, तो आपकी समझ बढ़ेगी ही नहीं — आप वही के वही रह जाओगे।

कर्ता का अधिकार — बदलाव के लिए मेहनत

शरीर की ताकत भी सब लेकर पैदा होते हैं — एक ही मां-बाप खिला रहे हैं, एक बेटा ताकतवर हो गया, एक बहुत कमजोर। हां, यह है कि आप में कर्ता का अधिकार है — चलिए, मैं लेकर तो पैदा हुआ, लेकिन मेहनत करके बहुत आगे तक जा सकता हूं। वही बदलाव है।

लेकिन बदलाव के लिए काम करना पड़ेगा, अथाह मेहनत करनी पड़ेगी; ऐसे बदलाव नहीं होगा। इसके लिए अटल इच्छाशक्ति चाहिए; आत्मविश्वास चाहिए, डेरिंग चाहिए, कॉन्फिडेंस चाहिए। वो भी लेकर पैदा होते हैं, पर कॉन्फिडेंस और आत्मविश्वास को मेहनत करके बढ़ाया जा सकता है। समाज में बहुत ऐसे बच्चे हुए, जिन्हें स्कूल ने निकाल दिया कि ये हमारे स्कूल के लायक नहीं — और वो साइंटिस्ट बने।

देखो साथ किसका है

जीवन में आपका साथ किसका है? आप देखोगे तो आदमी में जानवरों जैसा स्वभाव है — शेर की तरह डेरिंग, गीदड़ की तरह डरपोक। कहते हैं 'शेर की तरह जीता है' — मतलब सामने से बात करता है। कोई चापलूस है तो उसे गीदड़ कहा जाता है; कोई हर बड़े आदमी के पीछे-पीछे भागने लगता है तो कहते हैं कुत्ते की तरह दुम हिलाता है। वो स्वभाव हमारे अंदर है, गया नहीं है। अब आपने कौन से जानवर का स्वभाव अपनाया है?

अब जैसे आपके अंदर घोड़े की तरह दौड़ है, आपको दौड़ में आगे जाना है, लेकिन आपने गधे के साथ कर लिया — तो आप कभी दौड़ में नहीं जीत पाओगे; अगर उसका साथ नहीं छोड़ा तो वो आपको अपाहिज कर देगा। कुछ लोग समाज में ऐसे हैं कि उनकी क्षमता नहीं बढ़ाई जा सकती — आप उन पर कितनी भी मेहनत करो, उनको वही बन के रहना है; मैंने इसका खुद अनुभव किया है। उनका एक दायरा है, जैसे गधे का एक दायरा है। या तो घोड़े की बुद्धिमानी है कि गधे को छोड़ दे, या घोड़े की मूर्खता है कि गधा बन के मर जाए।

तो जिसके साथ रह रहे हो, देख लो — आपके होने से उसका कल्याण हो रहा है कि आपका? ग्रोथ किसका हो रहा है? एक का तो होना चाहिए। किसी के चक्कर में अपनी जान मत गंवाओ। बदले तो ठीक है; नहीं तो — भैया, नर्मदे हर, तुम अपने घर में; तुम इसी के लिए पैदा हुए हो और मैं कहीं और के लिए। या तुम्हारी चाल में कोई फायदा हो तो बताओ — थ्योरी लेकर मत घूमो, प्रैक्टिकल में आओ।