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प्रश्नोत्तर P1-0178 · भाग 1

योगी जी, आपने एक रील में कहा था कि ‘नया भरना बंद कर दीजिए’। उसका मतलब क्या था — व्यवस्थाएं जोड़ना बंद कर दें, या मोह-माया छोड़ दें? अगर वह सब बंद कर दिया तो हमारी समझ कैसे विकसित होगी, हम अर्थव्यवस्था में योगदान कैसे देंगे?

मैंने कहा कि नया भरना बंद करो, पुराना खत्म हो जाएगा — यानी राग-द्वेष। राग-द्वेष में जो लेन-देन कर रहे हो, वह बंद करो। राग-द्वेष कब होता है? जब आप कमजोर होते हो — सामने वाला दे देता है तो राग, नहीं देता तो द्वेष। अगर आप सामर्थ्यवान हो, तो वह दे तो राग नहीं, न दे तो द्वेष नहीं; आपको कहीं और से मिल जाएगा, आपके पास अनेक ऑप्शन हैं। तो राग और द्वेष भरना बंद करो। इसका मतलब — अगर आपको कुछ चाहिए तो उस लायक बन लो; रिक्वेस्ट मत करो। जैसे मैं यहां काम कर रहा हूं — जो चीजें हम मूल्य देकर ला रहे हैं, अगर मैं रिक्वेस्ट करूं तो मुफ्त आ जाएं; लोग ऑफर भी दे रहे हैं, आकर अपना परिचय बता रहे हैं कि मुझसे भी कुछ सेवा ले लो। और आपके सामने मैं उन्हें मना कर रहा हूं — अपना परिचय अपने पास रखो। अगर मैं ले लूं, तो इस नियम से कभी काम नहीं कर सकता, क्योंकि उनका दबाव मुझ पर हो जाएगा। पहले सेवा देंगे, फिर जब चाहेंगे आएंगे, अपनी मनमानी करेंगे; उन्हें आपसे राग हो गया। और अगर आपने कहा नहीं, आप जाओ, तो वे द्वेषी, शत्रु हो जाएंगे। हो गया राग-द्वेष। जो देगा, वह दबाएगा भी, क्योंकि वह अपनी ताकत दे रहा है — परिचय हो, पद हो, सेटिंग हो। तो उसकी ताकत का उपयोग ही मत करो, तब राग-द्वेष होगा ही नहीं। तो जब भी कुछ करना हो, सामर्थ्यवान होकर करो। देखो, यहां किसी से राग-द्वेष है? एकदम खुला बोलते हैं — आओ, बिस्किट खाओ, यहां के नियम में बैठो। कमजोर बनकर काम मत करो; जीवन में कुछ करना है तो उस लायक बनकर करो। मैं जो काम कर रहा हूं, उसके 100 नहीं, 101% लायक हूं, तभी कर रहा हूं; क्योंकि काम के बाद परिणाम भी आएगा — मैंने संकल्प लिया तो उसका परिणाम भी आपने देखा। इस सृष्टि में बस एक गुरु ऐसा है, क्योंकि वह मुक्त है और आपको हर तरह से सामर्थ्यवान बनाना चाहता है। बाकी दुनिया में जो भी आपको कुछ देगा, उससे ज्यादा लेने का प्रयास करेगा, और उसी में राग-द्वेष होगा। तो राग-द्वेष भरना बंद करो, क्योंकि राग-द्वेष ही तो बंधन है, और यह तभी होता है जब आप कमजोरी में लेते हो।

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वीडियो: मेरा कर्ता भाव से कैसे मुक्त हो ? · 2026-10-11