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प्रश्नोत्तर P11-0059 · भाग 11

मैं समर्पण करके अपने प्राणों की बाजी लगाने जा रही हूं; यह बहुत बड़ा रिस्क है।

कोई रिस्क नहीं है, ना प्राणों की बाजी है। आप जिस जिंदगी में थे, वहां से थक चुके हो, और वहां से निकलने के लिए उससे ज्यादा कुछ चाहिए। अगर वहां सुकून-आनंद होता, तो आप वहां से हटते ही नहीं; वहां घुटन, बेचैनी, धोखा, पश्चाताप मिला, तो निकलकर कहीं और जा रहे हो — प्राणों की बाजी कहां हुई? जब तक मूल तक नहीं पहुंचोगे, अपने आत्मतत्व में स्थिर नहीं होगे, तब तक ज्यादा के चक्कर में ही भागते रहोगे। रिस्क तब होता जब आप नीचे जाते — पर नीचे जाने में भी आपको रस आता है। रिस्क तो अगर इस दुनिया में किसी का है, तो गुरु का है — जो आपके लिए जंगल में बैठा है, आपके साथ ही उसका जीवन जा रहा है, बच्चों की तरह हर व्यवस्था दे रहा है, फिर भी कभी बोलता नहीं।

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वीडियो: 18 जनवरी 2026 रविवार प्रश्नोत्तरी #योगी · 2026-01-18