आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P12-0131 · भाग 12

पुराने संस्कार मुझे खींचते हैं, एक झटके में इतनी तगड़ी याद आती है कि लगता है ज्ञान धरा का धरा रह गया; अहंकार पर चोट लगती है तो लगता है यहां से भाग जाऊं। मैं शरीर से तो नहीं जाऊंगी, लेकिन उस मानसिक पीड़ा के समय मैं कौन सा मंत्र या बात याद रखूं कि मुझे निकलना है? और ये चीजें कितने दिन तक काम करती हैं?

वो तो आपके भोग का परिणाम है, वो तो आपको झेलना पड़ेगा। ये तब तक काम करेंगी जब तक इधर आपको कुछ नहीं मिलेगा; जैसे-जैसे इधर मिलने लगेगा, उधर की कम होने लगेगी। इधर मिल रहा है, तभी तो रुके हो — ऐसे रुक ही नहीं सकते। मैं अगर कहीं रुका हूं, तो जिसके लिए गया था वो मिल रहा है, तभी तो रुका हूं, नहीं तो रुक ही नहीं पाता। तो मुझे यह देखना चाहिए कि मैं वहीं वापस जा रहा हूं जहां से मैं दुखी था; अगर वापस वहां गया तो वही मिलेगा, वहां का तो फाइनल है। नई दुनिया बसाने की वही सोचेगा जो वहां पूरी तरह जी नहीं पाया — चाहे व्यक्ति विशेष के साथ, चाहे वैभव के साथ; जो मजबूरी में भागा हुआ है, वो फिर बसाना चाहेगा। और अगर कोई व्यक्ति समझकर निकला है, तो उसे भी याद सताएगी, लेकिन वो वापस नहीं जाएगा; बस अपनी स्थिरता बनाकर रखेगा।

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वीडियो: नया भरना बंद कर #योगी · 2026-09-13