प्रश्नोत्तर P12-0149 · भाग 12
तो परिणाम कैसा होगा, इसका निर्णय अस्तित्व करता है?
कर्म आप करते हो, देती प्रकृति है। आपने फसल बोई तो जो बोओगे वही आएगा ना — प्रकृति कई गुना देगी, लेकिन बोया किसने? आपने। तो देखोगे तो निर्णय करने वाले तुम ही हो। जिसने जो फसल लगाई, प्रकृति उसे वही देगी, उसके विपरीत नहीं। तभी तो फंसे हो — अगर निर्णय करने वाला कोई और होता तो तुम फंसते कैसे? कर्म करने से पहले निर्णय तो स्वयं ही लेता है कि मुझे यह कर्म करना है या नहीं; बीज जो भी बोया, उसका फल वही आएगा, प्रकृति का काम बस उसे कई गुना करके देना है। जैसे कंपनी में कोई बहुत अच्छा और मेहनत से काम करता है तो उसे पगार से ज्यादा बख्शीश और नाम भी मिलता है — वैसे ही आप मेहनत से कर रहे हो तो और मिल सकता है, और भाव की शुद्धि से कर रहे हो तो और मिलेगा।
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वीडियो: क्या किसी के आशीर्वाद से कुछ होता है ? #योगी · 2026-07-03