प्रश्नोत्तर P12-0150 · भाग 12
माफ कीजिए, जैसे सांसारिक जीवन में बच्चों के लिए या अपने लिए हम महत्वाकांक्षा रखते हैं — तो क्या वो हमारी आध्यात्मिक उन्नति के लिए बाधक है?
अगर ईमानदारी से देते हैं, लेन-देन करते हैं, तो बाधक नहीं। शब्द, दृश्य, गंध, रस, स्पर्श — ये शरीर की जरूरत है, और इनके देने-लेने में पूरी ईमानदारी है तो बाधा नहीं। इस देन-लेन में अगर छल, कपट, चोरी, बेईमानी, चापलूसी, मक्कारी, धूर्तता, पाखंड — एक भी है, तो बाधा है। इनसे विरक्त होकर अगर आप कर रहे हो, तब कोई बाधा नहीं, वो सहायक है। एक तरफ इच्छा बनाकर रख रहे हो और एक तरफ कह रहे हो मैं ठहर रहा हूं, दोनों कैसे होगा? ठहराव समझ से आएगा, जब आप इच्छा का त्याग करोगे।
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वीडियो: कोई रास्ता दिखाओ... #योगी · 2026-07-12