प्रश्नोत्तर P13-0050 · भाग 13
इच्छा उठते ही मन उसी को पूरा सत्य और संसार क्यों मान लेता है, जबकि विवेक भीतर मौजूद है? उस क्षण विवेक को जागृत कैसे करें?
संसार सच तो दिख ही रहा है ना; दिख रहा है तो सच तो मानोगे, झूठ भी तो नहीं मान सकते। अब संसार में यह पेड़ दिख रहा है — यह पहले नहीं था, बाद में नहीं रहेगा, लेकिन अभी तो है; झूठ भी तो नहीं कह सकते। इसलिए तो मैं कहता हूं ना — न झूठ, न सच। ईमानदारी, सत्कर्म अपनाओ, निकल लो।
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वीडियो: 14 रात अपनों की कुटिया हरियाणा यमुना तट #योगी · 2026-10-07