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प्रश्नोत्तर P13-0056 · भाग 13

महाराज जी, जब तक कर्ता का भाव है, सारी चीजें गलत होती रहती हैं।

और कर्ता का भाव तभी तक है, जब तक तुम कुछ बनना चाहते हो। तो बनने की इच्छा का त्याग करो — कर्ता का भाव हट जाएगा, फिर परमात्मा रहेगा। अगर आप कर्ता का भाव रखोगे, उस बनने की इच्छा रखोगे, तो फिर आप अपने आप में नहीं हो पाओगे। कुछ बनने की इच्छा का त्याग करो। जब तक तुम मालिक हो, उस मालिक से दूर हो — एक ही मालिक हो सकता है, या तो वो या फिर अपन; और अपन रहेंगे तो खेल खराब है। तो अब खेल से हट जाओ, मालिकपन को छोड़ दो, सेवकपन को अपना लो, ईमानदारी से कर्म पकड़ लो, और अपने आप को निकाल लो। कैसे भी अपने राग, द्वेष, मोह, आसक्ति, इच्छा, अपेक्षा, मेरा और कर्ता के भाव से अपने आप को छुड़ाओ; जहां भी कमियां हैं, उस कमी को निकालने के लिए काम करो।

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वीडियो: प्रत्यक्ष ज्ञान सत्संग #योगी · 2026-07-05