प्रश्नोत्तर P13-0057 · भाग 13
महाराज जी, मैंने आपका एक वीडियो देखा था जिसमें आपने कहा था कि राजा को पकड़ लो — सहस्रार चक्र को — और सबको छोड़ दो। मुझे लगा कि 'मैं' से बंधन है और 'मैं' से ही मुक्ति है। जब अपने 'मैं' को हटा देते हैं और परमात्मा का भाव आ जाता है, तो शुरू-शुरू में थोड़ा अनकंफर्टेबल फील होता है। जब उस तत्व पर, उस परमात्मा वाले में पहुंच जाते हैं, तो क्या उसके बाद नाम जप, मंत्र जप या किसी चीज की जरूरत होती है?
आप जब एक फोटो लेकर किसी के घर तक पहुंच गए, और वो सामने मिल गया, तो फोटो देखने की आपको जरूरत है? कोई जरूरत नहीं है — उसको पहचान गए, बस बात खत्म। जब आप विद्यालय में पढ़ रहे थे, तब किताब ढो रहे थे, बस्ता ढो रहे थे; किताब, टीचर, सबका नाम जरूरी था, कौन सी क्लास में बैठना है, कहां जाना है। और डिग्री मिलने के बाद क्या वह किताबें ढोने की जरूरत है, वो बस्ता ढोने की जरूरत है, उस टीचर को ढोना, उस स्कूल को ढूंढना जरूरी है — कि अपना काम करना जरूरी है? अपना काम करना, बस खत्म। पहुंचने के बाद बात खत्म हो गई।
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वीडियो: प्रत्यक्ष ज्ञान सत्संग #योगी · 2026-07-05