प्रश्नोत्तर P13-0093 · भाग 13
जब भी कुछ कर रहे हैं तो करने से पहले एक भाव बनता है और करने के बाद एक भाव — दोनों भाव को कैसे देखें? भाव नहीं पकड़ पा रहा।
उसी से आपका स्तर गिरेगा और उठेगा। कर्म मायने नहीं है — कर्म के पहले, कर्म के बाद एक भाव बनता है; उससे फल का निर्णय होता है। हर वक्त भाव बदलता है। आपको देखना है कि इस कर्म को करने जा रहा हूं तो इसमें मेरा भाव क्या है — उसमें निस्वार्थ होना चाहिए। जरूरत है कि मुझे इससे ज्यादा चाहिए? सामने वाले की जरूरत के लिए कर रहा हूं, अपने या परिवार की जरूरत के लिए? किसी का हानि होगा कि लाभ? सब जांच कर और फिर आगे करिए।
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वीडियो: उम्मीद छोड़ दो ! समझ के अपने आप को निकालो --आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान योगी #yogiji ka satsang - · 2025-07-08