आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P13-0094 · भाग 13

कहा जाता है सब स्वप्न है, ना ये सच है ना वो सच — तो फिर छल-कपट-छिद्र कहां से आ गए? और मुक्ति से पहले इस वाणी को ले लें तो क्या?

अष्टावक्र ने सिद्ध कर दिया — ये भी जो हम बात कर रहे हैं ये भी स्वप्न; सो गए वो भी स्वप्न, उठे वो भी स्वप्न — ना ये सच है ना वो सच। लेकिन तुलसीदास की वाणी मुक्ति तक पहुंचने के बाद की है। अगर हम पहुंचने के पहले उस वाणी का उपयोग कर लिए कि सब स्वप्न है, तब फंस जाएंगे। स्वप्न है तो फिर लड़ाई क्यों कर रहे हो? कोई गाली दिया तो कह दो ये तो स्वप्न है, कोई मार दिया तो कहो ये तो स्वप्न है — तब सारा स्वप्न निकल जाएगा। थ्योरी और प्रैक्टिकल में बहुत फर्क है। अनुभव करके आत्म-अनुभूति तक पहुंचना है; फिर कुछ भी नहीं। लेकिन अभी तो कुछ है। मुक्ति चाहिए लेकिन मुक्त होना नहीं — पिंजरा नहीं छोड़ेंगे। ये संसार पिंजरा है; अनेक पिंजरों में फंसे हो। पहले इन पिंजरों से छूटो।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: क्या संसार में कुछ भी सच नहीं है ? #yogijikasatsang #Aadhyatmiksatsang · 2025-07-16