आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P14-0060 · भाग 14

गुरु जी, संकल्प और समर्पण अलग-अलग चीजें हैं — समर्पण में तो आदमी नाव खोल देता है, जिधर जाए?

संकल्प किया है तो नाव में बैठोगे तो पतवार चलानी ही पड़ेगी, पार हो जाओगे। अब कुछ करना है तो नाव जिधर जा रही उधर थोड़ी जाने देगा। अगर उस पार कोई इंतजार कर रहा है, तो पतवार तो चलानी पड़ेगी। दायित्व भी निभाने हैं — दायित्व मिले हैं, कुछ कर्तव्यों का आपने चुनाव किया है, सब देखना है, बहुत समझ के चलना है। बस जहां भी रहिए, इतना ध्यान रखिए कि ईमानदारी अपना के जीवन जियो, और सत्कर्म। इतना ख्याल रख लिया तो मुक्ति से मोक्ष तक पहुंच जाओगे।

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