प्रश्नोत्तर P15-0061 · भाग 15
जहाँ हम पहले गए, वहाँ बिना गुरु-दीक्षा लिए कोई भाव ही नहीं देता था — आज जिस तरीके से दीक्षा दी जा रही है, उसके बारे में क्या कहेंगे?
शास्त्रों में कहा गया है कि एक शिष्य बनाने पर अगर उसका आत्मिक कल्याण नहीं हुआ, तो सौ गौ-हत्या का पाप लगता है — गुरु को, शिष्य को नहीं, शिष्य तो अबोध है। उसकी योग्यता नहीं थी तो दीक्षा क्यों दी? योग्य बनाने की क्षमता नहीं थी, तो उसे फँसाया क्यों? अगर आप इतने साल बाद कह रहे हो तेरी योग्यता नहीं, तो पहले दिन बोल देते कि योग्यता लेके आ, तब दीक्षा दूँगा — ये सच्चे गुरु की पहचान है। भीड़ बढ़ाने के लिए, संख्या बढ़ाने के लिए कि मेरे इतने शिष्य हैं, आत्माओं को भटका रहे हैं। कितनी उम्मीद से कोई इस मार्ग में जाता है कि मुझे आप सन्मार्ग बताओगे।
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वीडियो: इतनी पूजा पाठ भक्ति करते हैं लेकिन दुख क्यों आते हैं ? #प्रत्यक्षज्ञान #yogijikasatsang #आध्यात्म · 2026-08-10