आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P15-0173 · भाग 15

मेरे भगवान, महाभारत में भी बोले हैं कि किसी तत्वदर्शी संत को ढूंढो। तत्वदर्शी संत का मतलब क्या है?

जिसे बंधन का भी पता है, मुक्ति का भी पता है; जो बंधनों से मुक्त हो गया हो, और वह बंधन देख लिया हो कि बंधन क्या थे, उनसे कैसे छुटकारा पाया जा सकता है, और अपने आप को छुड़ा लिया हो। पांच तत्व हैं, छठवां तत्व आत्म तत्व को बोला गया है; उसे आत्मज्ञान भी हो जाता है, तत्व का भी ज्ञान हो जाता है, तो इस रूप से आप कैसे मुक्त हो जाओ, उसके लिए उसके पास मार्ग मिल जाता है। ऐसे लोगों से मिलने से आत्मिक कल्याण होगा। वो बताते-बताते आपको वहां तक लेके जाएगा कि कुछ नहीं है — इस संसार के बारे में, इस पिंड के बारे में, जहां-जहां से आप रस ले रहे हो, इतना बता देगा कि आपको समझ में आ गया कि कुछ है ही नहीं, ये तो एक भ्रम है। जब यह बात आप अपनी समझ से समझ लोगे, तब छूट जाओगे, आत्म में स्थिर हो जाओगे, आत्मज्ञान हो जाएगा। पांच तत्व से शरीर बना है; पिंड में फंसे और आपने इससे अपने आप को छुड़ा लिया, तो तत्व से अपने आप को छुड़ा लिया — तो आत्मज्ञान हुआ तो तत्वज्ञान भी हो गया।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: हमारी स्मृतियां कब संस्कार बनती हैं ?#प्रत्यक्षज्ञान #yogijikasatsang #साधना #आध्यात्म · 2026-08-11