प्रश्नोत्तर P15-0174 · भाग 15
गुरु जी, अगला जन्म किस आधार पर होता है — प्रवृत्ति, भाव, इच्छा-अपेक्षा, या कोई और कारण है?
इच्छा-अपेक्षा। अब जैसे मान लीजिए यह आपको क्या दिख रहा है? कपड़ा। क्या इसके अंदर धागा नहीं? धागे से कपड़ा बना; धागे में रुई है; रुई के पीछे फूल है, फूल के पीछे पेड़, पेड़ के पीछे बीज। मतलब इस कपड़े में बीज भी है, लेकिन दिख रहा है क्या? जिसको पूरी जानकारी ना हो वो बोलेगा तुम पागल हो, ये बस कपड़ा है। इसे कहते हैं तत्वज्ञान — इस कपड़े में सब है। और आखिरी में कुछ नहीं; बीज के पीछे तुम जा नहीं सकते — बीज के बाद फिर वही पेड़, पेड़ के बाद फिर वही बीज; घूमते रहोगे। इसीलिए मैं कहता हूं घूमो मत, 'कुछ नहीं' में आ जाओ, निकल लो। तत्वज्ञान आखिरी में ले जाके बता देता है कि कुछ नहीं है। मानव को बस परिवर्तन तक का पता है: किसी चीज को जला दो तो राख बनेगी, लेकिन राख भी तो रूप में है; राख के बाद आप क्या जाओगे, उसका क्या कर सकते हो? राख को बदलने की क्षमता प्रकृति को है, आपको नहीं। इसलिए एक काम करो — बाहर जाना बंद करो, अपने में जाओ। बाहर बस समझो और निकल लो; अपनी समझ विकसित करने के लिए बाहर से कुछ लेनदेन करना है, बस। बाहर ज्यादा मत उलझो, क्योंकि एक बाल कहां से आता है, दांत कहां से आता है, इसका भी पता नहीं लगा पाओगे। इसलिए बाहर का सदुपयोग करो और निकल लो — गन्ना खा लो, चना चबा लो; दांत कहां से आया, वो मत देखो।
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वीडियो: हमारी स्मृतियां कब संस्कार बनती हैं ?#प्रत्यक्षज्ञान #yogijikasatsang #साधना #आध्यात्म · 2026-08-11