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प्रश्नोत्तर P16-0112 · भाग 16

आपने बोला था कि हर विकार के पहले लालच आता है, फिर विकार बाद में आते हैं। तो लालच को कैसे गिराएं?

जब लालच आए तो लालच वाला काम मत करो। लालच तो पैदा हो जाएगा, क्योंकि हमारी आदत है — जैसे ही अपने से ज्यादा सामने वाले के पास कुछ देखेंगे, लालच का जन्म हो जाएगा। पैदा तो हो गया, लेकिन उस पर काम ही मत करो, तो विकार नहीं आएंगे। लालच का जन्म हुआ तो मर जाएगा; लेकिन आपने काम कर दिया तो आपने उसे जिंदा कर दिया, बढ़ा दिया। प्रवृत्ति आपकी वही हो गई है, आदत के गुलाम हो गए हो। लोभ का जन्म होगा — काम नहीं करना है। मोह आएगा — मोह में जाना नहीं है। अहम आएगा — उस पे काम नहीं करना है। अगर नहीं करोगे तो प्रवृत्ति से मुक्त होकर निवृत्ति में आ जाओगे। लेकिन कब? जब आप करना बंद करोगे। इन सबके पीछे मैं ही हूं — जो मेरा से मैं बनाया, हर जगह देखा जाए तो आप ही तो हो। प्रवृत्ति में झुंड है आपके साथ, उसमें भी आप हो लेकिन आप किसी और में हो; निवृत्ति में सिर्फ आप हो, और आप में परमानंद है। प्रवृत्ति में भीड़ है, और उस भीड़ में सुख-दुख है। तो मुझे अपने आदत वाले काम को छोड़ना है — जो मुझे गिरा रही है। और वह काम करना है जिससे मैं अपने आप को उठा सकूं, छुड़ा सकूं, प्रवृत्ति से मुक्त हो सकूं। पहले तो ईमानदार बनो; ईमानदार व्यक्ति ही सात्विकता से जी सकता है। नहीं तो आप शब्दों की चोट मारोगे — तलवार का घाव शरीर पे काम करता है, शब्दों का घाव मन पर; चोट तो दोनों से लग रही है ना। ईमानदार व्यक्ति कभी किसी को चोट नहीं देता; बेईमान व्यक्ति सबको चोट देता है, अपने को भी।

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वीडियो: ईमानदार तो सिर्फ ईमानदार #योगी · 2026-02-28