प्रश्नोत्तर P16-0125 · भाग 16
गुरु जी, इस जवाब से मैं पूरा संतुष्ट नहीं हुआ। मुझे लगता है आप बुद्धि को नकार रहे हैं। यह मैं मान गया कि वह पांचों इंद्रियों से परे है, लेकिन यह समझने के लिए भी तो बुद्धि आवश्यक है ना? अगर आत्मा से परमात्मा की यात्रा करने वाला मंद बुद्धि होगा, तो उसकी यात्रा शुरू ही नहीं होगी। तो क्या इसमें बुद्धि का रोल ही नहीं है?
देखिए, वह शब्द, दृश्य, गंध, रस, स्पर्श से परे है — कान, आंख, नाक, मुंह और त्वचा से परे। बुद्धि का तो हम उपयोग कर रहे हैं। बुद्धि को आप एक प्रकार की समझ बोल सकते हो; उसके अंदर पहले से जानकारियां हैं, जितनी हमने एकत्रित की हैं। बुद्धि द्वारा हम भटके, बुद्धि द्वारा हम अपने आप में आते हैं; और अपने आप में आते हैं तो बाहर जगत से मुक्त हो जाते हैं, और सत्य से ब्रह्म की यात्रा होती है। वहां फिर बुद्धि का काम गया — बुद्धि तो बाहर के लिए है। जब आप आत्म में पहुंचते हो तो आत्म को ज्ञान हो जाता है, और उस ज्ञान द्वारा वहां पहुंचता है। मन-बुद्धि से परे वह इसलिए है क्योंकि मन तो "चाहिए" में काम करता है; नहीं चाहिए तो मन कहां है? बुद्धि भी "चाहिए" में ही काम करती है। अगर आपको कुछ नहीं चाहिए तो हाथ स्थिर पड़ा है; चाहिए तब ना हाथ उठाओगे। चाहिए से मुक्त हो गए तो बात खत्म — अब आत्मा परमात्मा की यात्रा कर रही है। जैसे एक महिला गर्भ धारण कर ले, तो उसे और कुछ नहीं करना पड़ता; बस खानपान पर ध्यान रखते हुए अपनी समझ से इंतजार करना है — अब मां बनने की आंतरिक यात्रा होगी, वहां कोई बुद्धि नहीं लगानी। ऐसा नहीं कि आंतरिक हो गए, अपने आप तक पहुंच गए, तो बुद्धि का उपयोग नहीं करोगे — करना होगा, भोजन के लिए, व्यवस्थाओं के लिए, अपना ज्ञान देने के लिए। बुद्धि खत्म कैसे होगी? चाहे उपयोग करे, चाहे ना करे, उसके ऊपर है। लेकिन इंद्रियों द्वारा उसको नहीं पाया जा सकता। उसमें कामनाएं हैं, और वह कामनाओं में नहीं है, इच्छाओं में नहीं है — न "मेरा" भाव में है। बुद्धि का उपयोग करके आप अपने आप को बाहरी जगत से मुक्त करा सकते हो, सत तक। उसके बाद आंतरिक यात्रा होगी ब्रह्म की, और बाहर जगत के लिए आप ज्ञान बांटोगे, लोगों को आत्मिक कल्याण का मार्ग बताओगे।
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वीडियो: मैंने सुना है परमात्मा मन बुद्धि से परे हैं क्या यह सच है ? / #Parmatma #yogijikasatsang · 2024-08-19