प्रश्नोत्तर P16-0126 · भाग 16
तो फिर ज्ञान किसे होता है? और सही-गलत का निर्णय कौन करता है — क्या बुद्धि नहीं करती?
बुद्धि को ज्ञान नहीं होता, आत्म को ज्ञान है। बुद्धि को कहां से ज्ञान होगा? यह हाथ — हाथ को थोड़ी ज्ञान है, आप इसे चला रहे हो, चाहे यहां ले जाओ चाहे वहां। हाथ शरीर का अंग है, बस बुद्धि भी शरीर का अंग है। आत्म में सबके पास वही ज्ञान है; जिसको जैसी बुद्धि मिली है, वैसा उपयोग कर रहा है। निर्णय भी बुद्धि नहीं कर रही, आप कर रहे हो — आप स्वयं; बुद्धि निमित्त है। आपको जैसी जानकारी है, उससे आप निर्णय कर रहे हो कि सही है या गलत। कभी-कभी आप गलत को सही कर देते हो और सही को गलत; फिर कहीं से सही जानकारी लेकर उसे सुधारते हो — बुद्धि तब भी वही थी, अब भी वही है। आप बुद्धि से अलग हो। ज्ञान का स्तर आप बढ़ा रहे हो, बुद्धि को निमित्त बनाकर; बुद्धि केवल समझने-समझाने के लिए निमित्त है, ज्ञान पहले से है। हाथ को कहां ले जाना है, आपके ऊपर है; आंख आप बंद कर लोगे तो आंख अपने आप नहीं खुलेगी। जैसे हाथ अलग है, पैर अलग है — सबका अलग-अलग काम है; मुंह से स्वाद मिलता है, नाक से सुगंध — वैसे ही इस शरीर के अंदर बुद्धि का भी अपना एक कार्य है। सबकी बुद्धि अलग-अलग होती है — जितना जिसने ज्ञान अर्जित किया, जितना समझा। बुद्धि का उपयोग आप कैसे करते हो, आपके ऊपर है; इसका उपयोग करके आप अपने आप को समझ भी सकते हो और भटका भी सकते हो। कोई दृश्य देखते हो तो आंख फैसला नहीं करती, आप करते हो — क्या देखना है, क्या नहीं, वह भी आप तय करते हो; आंख निमित्त है।
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वीडियो: मैंने सुना है परमात्मा मन बुद्धि से परे हैं क्या यह सच है ? / #Parmatma #yogijikasatsang · 2024-08-19