प्रश्नोत्तर P16-0127 · भाग 16
मन और बुद्धि से परे कैसे जाएं? और गुरु जी, मन सीधे आ जाता है या मन से पहले विचार आता है? विचार से पहले क्या आता है?
मन-बुद्धि से परे जाना है। "चाहिए" में मन काम करता है; नहीं चाहिए, बात खत्म। आप मोबाइल-कंप्यूटर इतने दिन से चला रहे हो — पहले पेज पर आ जाओ तो एरो गायब, जब आप कुछ खोलना चाहते हो, कुछ चाहिए, तब एरो आता है। वैसे ही मन "चाहिए" में काम करता है: जब कुछ चाहिए तो मन आ जाएगा खट से, और नहीं चाहिए तो मन गायब। सब एक साथ होते हैं — आपने क्लिक किया तो विचार आया तभी क्लिक किया। लीन होकर इसलिए नहीं बैठ पाते, खाली इसलिए नहीं बैठ पाते कि आपने कुछ करने की आदत बना ली है — कुछ ना कुछ चाहिए। "मेरा" में जीने की आदत पड़ गई है; आपको रस चाहिए, बेरस में आप जी नहीं पाते, बोर हो जाते हो। अपने आप को समय नहीं दिया, अपने आप को समझ नहीं पाए। यह सब — शरीर, इंद्रियां, बुद्धि — हमें उपयोग करने के लिए मिला है, और कर्म से मिला है; इसलिए सबका बुद्धि-स्तर अलग है — कोई एक बार पढ़ता है, याद हो जाता है; कोई बहुत बार रटता है, याद नहीं होता। शब्द, दृश्य, गंध, रस, स्पर्श से परे स्वयं सत्य है, फिर उसके बाद उसकी यात्रा। "मेरा" में बुद्धि से यात्रा करोगे तो भटकते रह जाओगे। इसलिए पहले इनमें जो आसक्ति है उससे अपने आप को छुड़ाओ, तब यात्रा परमात्मा की होगी।
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वीडियो: मैंने सुना है परमात्मा मन बुद्धि से परे हैं क्या यह सच है ? / #Parmatma #yogijikasatsang · 2024-08-19