प्रश्नोत्तर P17-0077 · भाग 17
गुरु जी, साधक कितने तरह के होते हैं? और आत्मज्ञानी के पास जाने की पहचान क्या है?
तीन तरह के साधक होते हैं — स्वभाव में निकलने वाले, अभाव में निकलने वाले और कुभाव में निकलने वाले। स्वभाव वाले बहुत कम हैं: जिसे कोई कमी नहीं थी — ना आर्थिक, ना शारीरिक, ना मानसिक — उसे संसार में दुख दिखा और वह स्वयं की खोज में, दुख से मुक्ति की खोज में निकला; वह सात्विक जिएगा, आत्मज्ञान होगा तो समाज को ज्ञान देगा, और जिन्हें कुछ नहीं चाहिए वे उसके पास जाते हैं। अभाव में निकला (धन की कमी थी) वह जाकर पैसा जमा करेगा, बड़ा बनेगा — राजसी लोग, जिन्हें माल चाहिए, यज्ञ-हवन वालों के पास जाते हैं। कुभाव में निकला (घर पर लोगों ने दबाया) वह तंत्र मार्ग, अघोर में जाकर रौब जमाएगा — जिन्हें किसी को सताना-डराना है वे उसके पास जाते हैं। राजसी-तामसी वाले आपको खूब इज्जत देंगे और आपके पास जो है उसकी सफाई करेंगे; सात्विक वाला आपकी सफाई करेगा, आपको कोई मान-सम्मान नहीं देगा। आत्मज्ञानी के यहां कभी दो व्यवस्थाएं नहीं पाओगे — वहां वीआईपी-आम सब एक जैसे बैठते हैं, आपका बैकग्राउंड काम नहीं करता; वह बस बताता है कि तुम्हारा कल्याण कैसे होगा, रुकना है तो रुको नहीं तो जाओ।
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वीडियो: अद्भुत सत्संग ईश्वरी कृपा एकाकार / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-09-21