प्रश्नोत्तर P17-0078 · भाग 17
गुरु जी, तीनों प्रवृत्तियां हमारे अंदर भी हैं — सात्विक को कैसे बढ़ाएं, और राजसी-तामसी लोगों से कैसे बचें?
तीनों प्रवृत्तियां आपके अंदर भी हैं, अब आप किसे जागृत करते हो देख लो — सात्विक को जागृत करोगे तो आत्मज्ञान होगा; दिखावे वाली सेवा करोगे तो राजसी जागृत होगी; गुंडागर्दी करोगे, एरिया दबाकर रखोगे तो तामसी जागृत होगी। सात्विक बढ़ाने के लिए सत्कर्म करना पड़ेगा — बिना इच्छा-अपेक्षा की निष्काम सेवा; "कर्म ही पूजा है" मतलब निष्काम कर्म। राजसी-तामसी से बचना भी नहीं पड़ता — आप अपनी सात्विक ऊर्जा जागृत करो, वे आपके पास नहीं आएंगे; आते ही उनमें बदलाव होगा, बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे, भाग जाएंगे। क्योंकि सात्विक ऊर्जा जैसे-जैसे जागृत होती है, आप परमात्मा के करीब होते जाते हो — और परमात्मा शुद्ध, निर्विकल्प, सबसे मजबूत है, उसी की सत्ता में सब जी रहे हैं। उस तक पहुंचने का सीधा मार्ग है सत्कर्म और ईमानदारी से जीवन। एक है पहुंचना, एक है बातें करना — दोनों अलग हैं।
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वीडियो: अद्भुत सत्संग ईश्वरी कृपा एकाकार / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-09-21