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प्रश्नोत्तर P17-0097 · भाग 17

गुरु जी, सबको प्रभु ही चाहिए — किसी को माल के लिए, किसी को मोक्ष के लिए। तो प्रभु सबको मोक्ष क्यों नहीं दे देता? प्रभु है क्या?

प्रभु के बस में होता तो सबको मोक्ष दे देता — यह सब प्रभु के बस में नहीं है। प्रभु कर्ता से परे है और आप कर्ता में हो; वह आपको ना छुड़ा सकता है ना पकड़ा सकता है। प्रभु वही है जो ना कुछ लेता है ना देता है; जो कुछ लेता और देता है वह प्रभु नहीं, वह तुम जैसा ही है — कभी आप देने वाले की जगह खड़े होते हो, कभी लेने वाले की। मालिक नौकर को पेमेंट देता है, पर नौकर कई महीने उसे सेवा देता रहा — तो मालिक ही नौकर है, नौकर ही मालिक। जब नौकर और मालिक दोनों खत्म हो गए, द्वैत नहीं रहा, तब बात बनी। और यह आप ही के हाथ में है — तुम ही कर्ता, तुम ही धर्ता — तो अब विलंब क्यों? पहले भ्रम था कि कोई करवा देगा, अब सारा भेद खुल गया।

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वीडियो: अद्भुत सत्संग ईश्वरी कृपा एकाकार / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-09-21