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प्रश्नोत्तर P17-0098 · भाग 17

गुरु जी, हम प्रभु को खोज-खोजकर थक गए हैं, वह मिलता क्यों नहीं?

बिना पते के उसे खोजे चले जा रहे हो — उसका पता किसी को मालूम नहीं। किसी से घर पूछो तो वह पूछेगा कौन आदमी, क्या नाम, कहां रहता है — सारी डिटेल दोगे तभी बताएगा। आपके पास उसका पता ही नहीं, और अपना पता भी खो चुके हो — कई जगह पते बना दिए, कभी इधर कभी उधर भाग रहे हो, खुद एक पते पर नहीं हो। पहले खुद लापता हो जाओ, तब लापता वाले को खोजो। समझकर आगे बढ़ो, प्रभु आपको खोज लेगा, क्योंकि उसके पास सबका पता है। आत्मदर्शन करोगे तो उसका पता आपके अंदर है — एक ही जगह, आत्म में, सत्य में; और आप "मेरा" में, वस्तुओं में, आसक्तियों में, कामनाओं में खोज रहे हो, कभी सच कभी झूठ में जी रहे हो।

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वीडियो: अद्भुत सत्संग ईश्वरी कृपा एकाकार / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-09-21