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प्रश्नोत्तर P17-0144 · भाग 17

गुरु जी, मैं बड़ा बनना चाहता हूं, अपना पसारा करना चाहता हूं — क्या यह इस बात का संकेत है कि मैं अपने मूल से, उस बड़े से बिछड़ गया हूं?

मैं तो उसी बड़े का अंश हूं ही, पर क्षणिक "मैं" उससे बड़ा बनना चाहता है — यही गड़बड़ है। जिसके द्वारा मैं बड़ा बनना चाहता हूं, वह भी तो उसी से है, वह भी बड़ा है। जैसे — मैं हूं और आप हो, यही दुनिया है। मुझे बड़ा बनना है तो आपको नीचा करना पड़ेगा, कोई छोटा होगा तभी मैं बड़ा हो पाऊंगा। पर जब मैं आपको छोटा कर रहा हूं, और आप भी उसी से हो, तो मैं खुद छोटा हो जा रहा हूं — यही मेरा झूठ, यही मेरा गिरना, यही उससे मेरी दूरी है। मैं था तो था — मैंने तुलना क्यों की? तुलना में व्यक्ति फंस गया। तुलना इसलिए करते हो कि अपने आप को बड़ा सिद्ध करना चाहते हो।

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वीडियो: मूल से मेरा हटना कैसे हुआ ? रविवार प्रश्नोत्तरी #योगी · 2025-12-21