प्रश्नोत्तर P17-0145 · भाग 17
गुरु जी, मूल से मेरा हटना कैसे हुआ — हम परमात्मा से अलग होकर इस दुनिया में कैसे आए?
(समझने के लिए एक कल्पना है।) जब हम उसके पास थे, तब उसकी दुनिया देखकर लगा कि यहां तो सब दुखी हैं, त्राहिमाम है — कैसी दुनिया बना दी तुमने! मैं जाकर सही करके आता हूं, अपने तरीके से। उसने कहा ठीक है, तू कर्ता का अधिकार ले ले; पर इस दुनिया में आने के लिए तुझे शरीर लेना होगा, और जैसे ही शरीर लेगा, तू मुझसे दूर हो जाएगा, मालिक हो जाएगा। उस कॉन्ट्रैक्ट में यही हुआ कि "मैं ही करूंगा, तू बस साइड हो जा, मैं चिल्लाऊं तो भी मत आना"। अगर उसके सहारे करने जाते, जैसे कोई घर वाले से कहकर जाए कि मेरा ध्यान रखना, तो मालिकपन का भाव नहीं आता। तब से दुनिया बसा रहे हो, और बसाते-बसाते ऐसी स्थिति आ गई कि अब उसी से भागना चाहते हो — पर तुम्हारी दुनिया वाले पकड़ रहे हैं: मेरा हिसाब करो, तुमने वादे किए, तुमने मेरा उपयोग किया। बैटिंग खेल ली, अब बॉलिंग का नंबर आया तो भाग रहे हो। तब उसके जैसा एक गुरु होता है, जिसकी अपनी कोई दुनिया नहीं, कोई अपने लोग नहीं — वह बीच में मीडिएटर है। जब तुम कहते हो कि अब मैं अपने मूल में जाना चाहता हूं, तब वह बताता है कि तेरी हालत कैसी हुई और तू मालिकपन का भाव छोड़कर उसमें सुधार कैसे कर सकता है।
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वीडियो: मूल से मेरा हटना कैसे हुआ ? रविवार प्रश्नोत्तरी #योगी · 2025-12-21