प्रश्नोत्तर P18-0035 · भाग 18
गुरु जी, लोग कहते हैं "शून्य हो जाओ" — क्या शून्य ही अंतिम स्थिति है?
मैं कहता हूं नहीं, शून्य में भी कुछ है। शून्य भी तो कुछ है — आप कितना भी छोटा या बड़ा शून्य खींचो, अंदर एक दायरा बन गया, बाहर का हिस्सा अलग हो गया — दो हो गए, द्वैत तो है ही। और गणित अपना-अपना है: कोई शून्य इधर लगाता है, कोई उधर लगाकर दस गुना बढ़ा देता है। शून्य के भी पीछे जाना है, क्योंकि शून्य के पीछे आप हो — जहां कुछ भी नहीं; न सुख, न दुख, न पीड़ा, न हंसी, न रोना। वहीं अद्वैत है।
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वीडियो: योगीजी की आत्मकथा अज्ञान से ज्ञान तक खोज में कुछ अनुभव की बातें ! #yogijikasatsang #pratyakshgyan · 2024-08-25