प्रश्नोत्तर P18-0051 · भाग 18
गुरु जी, पुराना प्रारब्ध रुक जाए या खत्म हो जाए और नया प्रारब्ध न बने — इसके लिए क्या करें?
पुराने को रोकने का कोई उपाय नहीं, वह भोगने का है। आगे न बने, इसके लिए बस ईमानदारी अपना लो — कर्म का सिद्धांत है, पिछला खत्म हो रहा है और अगला तब बनेगा जब आप बेईमानी करोगे। ईमानदारी में प्लानिंग नहीं करनी पड़ती, बेईमानी में प्लानिंग करनी पड़ती है — एक झूठ के लिए सौ झूठ बोलने पड़ते हैं। सब फिक्स था, आपने ही फिक्स किया था; अब बेईमानी करके एक और फिक्स कर रहे हो — एक खत्म हो रहा, एक बन रहा। ईमानदारी में जो पीछे फिक्स किया था वह भोगकर जा रहा है, आगे तैयार नहीं हो रहा। भोगना तो पड़ेगा ही — ऐसा नहीं कि बेईमानी करके उससे बच गए; बस हिसाब में और कुछ न चढ़े, इसलिए बेईमानी मत करो। बोलते-बोलते यहां तक आ गए, अब बंद करिए। सबसे पहले जीवन में ईमानदारी अपनानी पड़ेगी, तभी कुछ होगा।
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वीडियो: आत्मज्ञान किस स्थिति में होता है ? #aadhyatmik_satsang #livesatsang #yogijikasatsang #pratyakshgyan · 2025-01-03