आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P19-0097 · भाग 19

गुरु जी, आप किसी को भक्त या चेला क्यों नहीं बनाते, और आपने सेवक भाव को ही क्यों चुना?

इतने साल इस गांव में रहा, गरीब से अमीर तक मिले, पर ना कोई भक्त बना ना चेला, मैं परिचय भी नहीं पूछता — क्योंकि मैं बनाना नहीं चाहता, बनने से मुक्त कराना चाहता हूं; बनना ही भटकाव है। आप बनते-बनते परेशान हो गए हो — कभी किसी का बेटा, कभी पति, फिर किसी का शिष्य बना दिया और कंठी दे दी, पर कल्याण नहीं हुआ। अब ना मुझे बनना है ना बनाना है; ना शिष्य की इच्छा है ना गुरु की। सेवक का मतलब जो चरणों में रहे — उसके नीचे कोई स्टेज ही नहीं, तो गिरेगा कहां? इसलिए मैंने आत्मिक रूप से सेवक भाव स्वीकार किया और उसमें जीता भी हूं — सुबह से भोजन नहीं किया, सेवा में लगा हूं; गुरु के भाव में होता तो पहले भोजन करता और आप मेरा इंतजार करते। जो काम लिया है उसे पूरी मेहनत से करता हूं, लोगों को मार्ग बताकर निकल जाना है।

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वीडियो: भगवान और परमात्मा में क्या अंतर है ?#yogijikasatsang #प्रत्यक्षज्ञान #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-07-19