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प्रश्नोत्तर P21-0010 · भाग 21

प्रभु ने तो सबके लिए कुछ सोचा होगा कि इच्छा-अपेक्षा में फंसे मेरे बच्चे वापस मेरे पास कब आएंगे?

अगर प्रभु के बस में होता तो सबको छुड़ा लेता — उसने तो छुड़ाकर ही रखे थे; जब हम उससे अलग हुए, तभी तो बंधन में आए। अब छुड़ाना प्रभु के बस में नहीं, मेरे बस में है — यहां प्रभु कुछ नहीं कर सकता; कर सकता तो हमें परेशान कैसे रखता? प्रभु की तरफ से न मुक्ति है न बंधन — मेरी तरफ से बंधन है और मेरी तरफ से ही मुक्ति मिलेगी। सीधी-सी बात है, इसे समझो।

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वीडियो: इच्छा अपेक्षा क्या है?इससे कैसे मुक्त होते है?(Freedom from Desire & Expectation) Explained in Hindi · 2026-03-07