प्रश्नोत्तर P21-0052 · भाग 21
गुरु जी, शहर लौटकर बीवी-बच्चों के बीच व्यवहारिकता में तो करना ही है — तब क्या करें?
पहले मैं फंसने के लिए कर रहा था, अब निकलने के लिए करूंगा। सारे दायित्व को निभाते हुए, कर्तव्य को निभाते हुए बस करते हुए देखिए। अभी तक आप कर रहे थे, करने में लिप्त थे; अब करते हुए अपने आप को देखिए, अपने आप को अलग रख के करिए। बस उचित करिए, अनुचित ना करिए। शब्द, दृश्य, गंध, रस, स्पर्श — ये हमारे शरीर की जरूरत है; ये करते हुए अपने आप को देखिए — देखने वाले आप, करने वाला शरीर। बस उचित होना चाहिए, अनुचित नहीं, इतना विशेष ध्यान रखिए, क्योंकि शरीर भोग से आया है, योग से नहीं आया। बस ईमानदारी से देख लो, और देते हुए देखो कहीं त्रुटि तो नहीं हो रही है। ध्यान क्या है? ध्यान से छुड़ाना ध्यान है। छुड़ा लो अपने आप को — यही ध्यान है, यही ज्ञान है, यही योग है, यही भक्ति है: करते हुए देखना, बस उचित-अनुचित का ध्यान।
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वीडियो: ध्यान में ध्यान कैसे करें ? · 2026-07-01