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प्रश्नोत्तर P21-0136 · भाग 21

गुरु जी, जब हम बैठते हैं, अपने में होने का प्रयास करते हैं, तो मन में अलग-अलग विचार चलने लगते हैं — क्या करें?

वो तुम्हारे किए गए कर्मों के विचार हैं। मन के क्या विचार — तुमने जो किया है वही तो विचार आ रहे हैं, तो देखो क्यों आ रहे हैं; उन विचारों में जाओ, ऐसे बैठने से नहीं होगा। कोई विचार तुम्हें परेशान करेगा, कोई विचार तुम्हें खुश भी करेगा। विचार तो अपने आप आएंगे-जाएंगे, आपसे क्या मतलब? आप देखो कि आप किसी विचार में लिप्त तो नहीं हो, कोई विचार परेशान तो नहीं कर रहा। और यह भाव बना के रखना है कि मैं क्या करूं कि मुझे आत्मज्ञान हो जाए — मेरे द्वारा ऐसा क्या कर्म हो कि मुझे मेरी उपलब्धि हो जाए, मैं उस परमानंद को उपलब्ध हो जाऊं। धीरे-धीरे प्रयास करो।

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