प्रश्नोत्तर P21-0148 · भाग 21
गुरु जी, कोई मजबूत किसी कमजोर को मारे तो क्या बीच-बचाव करना चाहिए?
क्यों नहीं करना चाहिए? कौन बोला नहीं करना चाहिए? लेकिन यह देखना है कि कोई मार क्यों रहा है — कमजोर ने मार खाने वाला काम तो नहीं किया। और मैं आपको अपने अनुभव से बताऊं — कोई भी काम करो ईमानदारी के साथ करो, और किसी के ऊपर भरोसा रख के मत करो, लिखा-पढ़ी के साथ करो। क्योंकि जब आदमी की मजबूरी निकल जाती है तब वह सीधा गीदड़ से शेर बन जाता है; जब तक उसकी जरूरत रहती है तब तक "हां-हां" करता है, जैसे जरूरत निकली, अपने असली स्वरूप में आ जाता है। मैंने वहां भी जमीन ली, यहां भी ली, वहां आश्रम बनाया, काम किया — खूब भरोसा करो, लेकिन अगर कुछ लेन-देन कर रहे हो तो कानूनी तौर से लिखा-पढ़ी कर लो; नहीं तो सामने वाले का काम निकल जाएगा और आपको उसके पीछे घूमना पड़ेगा। उसके कर्म का परिणाम उसको आज नहीं तो कल मिलेगा — जब निर्दोष व्यक्ति के अंदर से बद्दुआ निकलेगी तो सामने वाला बचेगा नहीं; लेकिन अपने को तो बिना किए मिल रहा है। तो सारे साधकों से एक ही बात कहूंगा — ईमानदारी के साथ, सत्कर्म के साथ जियो और कानूनन जियो; लेन-देन का प्रूफ होना चाहिए, ताकि सामने वाला बदल जाए तो आप कार्रवाई कर सको।
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