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प्रश्नोत्तर P21-0150 · भाग 21

गुरु जी, दुनिया में बहुत दिखावा है। मैं सिंपल मैरिज करना चाहता हूं, बर्थडे मनाना भी नहीं चाहता, लेकिन घर में ऐसा वातावरण और दबाव है कि रजिस्टर मैरिज नहीं, धूमधाम से ही करना है, लोन लेना पड़े तो भी परवाह नहीं। योग तो वैयक्तिक मार्ग है, पर घर वाले कहते हैं वैयक्तिक निर्णय नहीं लेना, हमारे कंट्रोल में रहो। इस वक्त हम कैसे बर्ताव करें?

ना तो मुझे मेरी मनमानी करनी है, ना तो मेरे परिवार से मनमानी करनी है। विरोध में किसी का नहीं करना है। मुझे देखना है कि मुझे ये जीवन मिला है — मेरा उद्धार कैसे होगा, मेरा जीवन कैसे अच्छा होगा, और जो मेरे साथ हैं उनके लिए मैं क्या अच्छा कर सकता हूं। मैं उनके तरीके से नहीं करूंगा, और ना मैं अपने तरीके से करूंगा — उनके लिए क्या जरूरी है, वो करूंगा। मैं उनका विरोध नहीं करूंगा। लेकिन मेरा जीवन कैसे अच्छा हो उसके लिए मैं काम करता हूं; अगर उसमें कोई विरोधी खड़ा हो जाता है तो मैं उसके विरोध में खड़ा होके उसे जवाब दूंगा, चाहे वो मेरी मां हो चाहे बाप। लेकिन मुझे इतना करना है कि मुझे अनुचित कार्य नहीं करने। क्योंकि मेरे जीवन के लिए क्या जरूरी है, मेरे से ज्यादा कोई नहीं समझ सकता। बच्चे के लिए क्या जरूरी है यह छोटे में मां-बाप को पता होता है, पर जैसे ही वो जीव बड़ा होता है उसे समझ में आ जाता है कि मेरे लिए क्या ठीक है और क्या ठीक नहीं — गलत-सही का सबको पता है। तो आप देखो कि मेरे जीवन के लिए जरूरी क्या है; और जो लोग मुझसे जुड़े हैं, मैं ऐसा कोई कार्य नहीं करूंगा जिससे उन्हें तकलीफ हो — और अगर होती है तो उसके जिम्मेदार वो हैं, मैं नहीं; लेकिन मुझे ये देखना है कि मैं जिम्मेदार नहीं हूं।

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वीडियो: मैं कहां हूं ? कर्नाटक कलबुरगी में पुनः सत्संग 5 जुलाई 2026 #योगी · 2026-07-06