प्रश्नोत्तर P21-0151 · भाग 21
गुरु जी, अगर मेरे ऐसा करने से घर वालों को तकलीफ होती है तो?
उसके जिम्मेदार वो हैं। हम जमीन पे चल रहे हैं, लाखों जीव मर जाते हैं — तो क्या करें? आप इस दुनिया में कुछ भी करोगे, तकलीफ होना ही होना है; लेकिन मुझे ये देखना है कि तकलीफ के लिए मैं काम नहीं कर रहा हूं। किसान हल चलाता है, उसे पहले ही पता है कि लाखों जीव मर जाएंगे; घर बनाने वाले को पता है — पर जीने के लिए जरूरी है। किसान दवा भी मारता है, पर जीव को मारने के लिए नहीं, फसल को बचाने के लिए — उस फसल पर किसान का अधिकार है, उस जीव का नहीं। लेकिन मुझे ये देखना है कि मैं जानबूझकर उसे दुखी तो नहीं कर रहा; रास्ते में जा रहे हो, आप बचा सकते थे, फिर भी देखकर पैर रख दिया — तब आपको दोष लगेगा, क्योंकि आपका मारने का भाव आ गया। तो अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए आप कुछ भी कर सकते हो; उसमें किसी को तकलीफ होती है तो उसके जिम्मेदार आप नहीं हो, लेकिन आपको देखना पड़ेगा कि आपका लक्ष्य आपके काम के प्रति था, ना कि उनको तकलीफ देने का। जब मुझे कुटिया का निर्माण करना था तो मैं कई हफ्ते रोया — क्योंकि लोग आएंगे, गाड़ी से आएंगे, कुटिया तक आने में जितने जीव मरेंगे उसका कहीं ना कहीं जिम्मेदार मुझे भी मिलेगा। मैं 12 साल घूमा, अपने लिए कभी कुटिया नहीं बनाई; पर ज्ञान फैलाने के लिए कोई बेस-आधार चाहिए, नहीं तो ज्ञान तुम्हारे साथ ही चला जाएगा। तो मैंने कहा — कोई बात नहीं, अगर मेरे करने से समाज हित का कार्य हो रहा है तो उसको भी मैं भोगने के लिए तैयार हूं। तो मुझे ये देखना है कि मैं किस लिए कर रहा हूं — और वो मुझे ही पता है। मैं ऐसा कोई कार्य ना करूं कि किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे; अगर पहुंच रहा है तो उसका जिम्मेदार वो होगा। कर्म दिखता है, भाव नहीं दिखता — किस भाव से कौन सा कर्म कर रहा हूं, सिर्फ मुझे पता है। प्रथम भाव और आखरी भाव से फल का निर्णय होता है, कर्म से नहीं; बीच में भाव डगमगाता है, लेकिन प्रथम भाव को बनाए रखना।
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वीडियो: मैं कहां हूं ? कर्नाटक कलबुरगी में पुनः सत्संग 5 जुलाई 2026 #योगी · 2026-07-06