प्रश्नोत्तर P21-0156 · भाग 21
गुरु जी, क्या इच्छा ही दुख का मूल कारण है?
हां, इच्छा ही दुख का मूल कारण है, लेकिन इच्छा क्या है उसे समझना है। एक होती है जरूरत — अपनी योग्यता के अनुसार; सबकी योग्यता है और सबकी अपनी-अपनी जरूरत है। जब आप योग्यता से ज्यादा पाने की इच्छा रखते हैं, वो दुख का कारण है — मिल गया तो भी, नहीं मिला तो भी। जैसे आप बनिए की दुकान पर गए और उधार मांगा, जबकि आपकी योग्यता नहीं है — उधार दे दिया तो उस बनिए के प्रति राग हो जाएगा, नहीं दिया तो द्वेष हो जाएगा कि बहुत बुरा है। लेकिन आप पैसा लेके जाते और सामान लेके आते तो ना उससे राग होता ना द्वेष। जरूरत में तो जानवर भी जीते हैं — हमने कभी नहीं कहा कि ये इच्छा में घूम रहा है। तो जरूरत में अपनी योग्यता के अनुसार जी रहे हो तो इच्छा नहीं; इच्छा उसे कहते हैं जब योग्यता से ज्यादा पाना चाहते हो, और उसके लिए काम करते हो तो फंस जाते हो — राग में या द्वेष में, हर स्थिति में। और संकोच-दबाव में कभी हां में हां मत करिएगा जब तक खुद समझ में ना आ जाए, क्योंकि मेरे समझने से ही मेरी यात्रा होगी।
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वीडियो: मैं कहां हूं ? कर्नाटक कलबुरगी में पुनः सत्संग 5 जुलाई 2026 #योगी · 2026-07-06