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प्रश्नोत्तर P21-0169 · भाग 21

गुरु जी, आपने कहा कि हमारी योग्यता के अनुसार हमें मिलता है — तो हम पहचानें कैसे कि हमारी योग्यता क्या है? पैसे के लेन-देन की योग्यता नहीं, आत्म साक्षात्कार के लिए अंदर की योग्यता — वो कैसे समझें?

दो स्थिति में मिलता है — एक, मेरी योग्यता नहीं है तो मैं बेईमानी के द्वारा उसको हासिल करता हूं; एक, मेरी योग्यता है तो स्वाभाविक मुझे मिल जाता है। अगर मुझे सत्संग समझ में आ रहा है तो मेरी योग्यता है — ये पक्का है। अब जितना समझ में आ रहा है उतना काम करना पड़ेगा, तब परिणाम आएगा। बहुत लोग हैं जिन्हें सत्संग समझ में ही नहीं आता — बाहरी तौर से बोल सकते हैं कि उनकी योग्यता नहीं, लेकिन ये पक्का नहीं, क्योंकि ऐसे लोग भी हुए जिन्हें समाज ने बहुत कमजोर कहा और उन्हें आत्मज्ञान हो गया — जैसे कालिदास; आदि गुरु शंकराचार्य का एक शिष्य था, उसे कुछ समझ में ही नहीं आता था, लेकिन उसका समर्पण ऐसा था कि गुरु ने कृपा की। तो अगर मैं अपना आत्मिक कल्याण चाह रहा हूं और आत्मिक कल्याण की बातें मुझे समझ में आ रही हैं तो मेरी योग्यता है; उस योग्यता पे काम करोगे तब परिणाम आएगा।

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वीडियो: मैं कहां हूं ? कर्नाटक कलबुरगी में पुनः सत्संग 5 जुलाई 2026 #योगी · 2026-07-06