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प्रश्नोत्तर P21-0177 · भाग 21

गुरु जी, बाहरी दुनिया में बहुत सारी साधनाएं होती हैं — जप, दीक्षा देकर साधना पथ पर चलाना। ईमानदारी और सत्कर्म से साधना कैसे हो सकती है, ये मेरी समझ में नहीं आ रहा — साधना और सत्कर्म दोनों कैसे हैं?

साधना का मतलब अपने आप को सुधारना — बस यही साधना है। तुम ईमानदारी से सुधरोगे, सत्कर्म से सुधरोगे — तुम कैसे सुधरोगे वो देख लो। अब आप देखो, क्या आप माला करने से सुधर जाते हो? दवा की उसे जरूरत है जो बीमार हो; कोई बीमार नहीं है तो उसे दवा की जरूरत नहीं। तो साधना की जरूरत इसलिए है कि मैं बिगड़ा हुआ हूं। सुधारना ही साधना है — इस पर चिंतन करो। और आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान सत्संग चैनल खोल लो, उस पर हजारों वीडियो हैं, सुनो, खुद मेहनत करो।

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वीडियो: मैं कहां हूं ? कर्नाटक कलबुरगी में पुनः सत्संग 5 जुलाई 2026 #योगी · 2026-07-06