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प्रश्नोत्तर P21-0178 · भाग 21

गुरु जी, मुझे भवानी पर बहुत श्रद्धा थी। जब मेरे जीवन में, मेरी बेटी और मेरी नानी के साथ इतना उतार-चढ़ाव हुआ, तो मैंने भगवान को दोषी माना। बाद में लगा कि शायद मेरे कर्मों का फल है, शायद उसके भविष्य में कुछ अच्छा लिखा होगा — ऐसे अपने आप को समाधान दे रही हूं, लेकिन वो पहले जैसी भक्ति नहीं आ रही। क्या भगवान पर मेरा दोष देना ठीक है, और पहले जैसी भक्ति फिर कैसे उत्पन्न करूं?

जिस भगवान की आप भक्ति कर रही थीं, क्या उसने आपसे वादा किया था कि मैं आपकी मदद करूंगा? कभी आश्वासन दिया था? नहीं। क्या ऐसी घटना समाज में और लोगों के साथ नहीं हुई? भक्ति मैं किस लिए कर रही थी? लालच की भक्ति में दुख ही दुख मिलता है। उसने ये भी नहीं कहा कि तुम मेरी भक्ति करो — तो आप उसे कैसे दोषी मान रही हैं? भक्ति तो आपने अपने मतलब के लिए की। आपके मानने से वो नहीं है — था, है और रहेगा। अपनी कामनाओं-वासनाओं की पूर्ति के लिए हम भक्ति करते हैं, और ये भक्ति हमें दुख देती है। भक्ति तब होगी जब भक्ति में ये प्रार्थना होगी कि मेरे कर्मों का फल भोगने के लिए मैं तैयार हूं, तेरे अलावा मुझे कुछ नहीं चाहिए। अपनी वासना-कामनाओं को भक्ति का नाम मत दीजिए। अब भक्ति इसके लिए करिए कि जितनी मेरी सजा है, जल्दी से जल्दी दे और छुड़ा, ताकि मैं तेरे पास आ जाऊं — भोग से बचने के लिए नहीं, भोग को भोगने के लिए भक्ति करनी है, क्योंकि एक भी भोग बाकी रहा तो फिर वहीं पड़ा रहूंगा। एक कहानी है — एक अंधा, लंगड़ा भक्त था, उसके बर्तन मांजने साक्षात शंकर भगवान आते थे; उन्होंने कहा तुझे इतना दुख है, तू किसकी भक्ति कर रहा है, क्या मिलेगा? भक्त बोला — ये मेरे कर्मों की सजा है; भक्ति मैं सजा से मुक्त होने के लिए नहीं कर रहा, मेरी भक्ति अलग है, मेरे भोग अलग हैं। मंदिर शांति का केंद्र था — मूर्ति को अच्छा बोलो बुरा बोलो, वो ताकतवर होकर भी अपने आप में स्थिर रहती है; मंदिर जाके यही सीखना था कि कोई अच्छा कहे चाहे बुरा, मुझे अपना कर्म करना है। आज उसे व्यापार का अड्डा बना दिया। भक्ति निर्विकार होने के लिए करिए, कामनाओं-वासनाओं से मुक्त होने के लिए, बुरे संस्कार और बुरी आदतें छोड़ने के लिए प्रार्थना करिए। एक बार अकेले में बैठकर सिर्फ इस जन्म के कर्म ईमानदारी से देख लीजिए — आप बोलोगे कि मुझे इतना कम दुख क्यों दिया; मैंने अपने आप को देखा है। बेमतलब हम दूसरों को दोष देते हैं।

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वीडियो: मैं कहां हूं ? कर्नाटक कलबुरगी में पुनः सत्संग 5 जुलाई 2026 #योगी · 2026-07-06