प्रश्नोत्तर P22-0005 · भाग 22
गुरु जी, शरीर को मरने के बाद जला देते हैं, आत्मा तो निरंतर है। बचपन से हमें डराया गया कि यमराज ले जाएगा — तो यमराज किसको ले जाता है? मुझे लगा कि वो हमारे कर्मों को ले जाता है, भगवान के सामने बताता है, और उसी से अगला जन्म होता है — क्या ये सही है?
एक तो मैं हूं, एक शरीर। शरीर के भी रूप का नाश होता है, तत्व का कभी नाश नहीं हो सकता — वो परिवर्तनशील है; ना शरीर का नाश हुआ, ना मेरा नाश होगा। मैंने इस शरीर को छोड़ा — अगला शरीर तभी धारण करूंगा जब कोई इच्छा-अपेक्षा, कोई कामना होगी। अगर इच्छा-अपेक्षा दोनों नहीं, कोई कामना नहीं, तो मैं अपने मूल की यात्रा करूंगा, जहां से आया हूं; और इच्छा-अपेक्षा रही तो भिन्न-भिन्न शरीर लेता रहूंगा। आप रूप में वशीभूत हो, तत्व में नहीं — शरीर जल जाता है, रूप का जहां नाश हुआ, आप राग छोड़ के चले आते हो; क्या उस राख में वो शरीर नहीं है? है — पंच तत्वों में विलीन हो जाता है। आप इस संसार में तभी तक रहोगे जब तक आपकी कामना है; कुछ नहीं चाहिए तो अगला शरीर धारण नहीं करोगे, जहां से आए हो वहां चले जाओगे।
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वीडियो: मैं कौन हूं ? कर्नाटक कलबुरगी में पुनः सत्संग 28 जून 2026 #योगी · 2026-06-29