प्रश्नोत्तर P22-0006 · भाग 22
गुरु जी, शरीर धारण करने से तो हम लोगों का अच्छा-भला भी कर सकते हैं ना — जैसे आप जो ज्ञान बांट रहे हैं, उससे सबका भला होगा?
भला तो तब कर पाओगे जब अपना कर पाओगे। आपको क्या लगता है — वैभव देना भला है? किसी का रोग ठीक करना भला है? ये ज्ञान तो तभी बांट पाओगे जब आप इच्छा-अपेक्षा से मुक्त होंगे, जब आत्म तत्व में स्थिर हो जाओगे; उसके पहले तो बांट ही नहीं सकते — उसके पहले जितना भी ज्ञान दोगे, शरीर तक रहेगा। आत्म तत्व का ज्ञान तभी दोगे जब आत्म तत्व में स्थिर हो जाओगे, और वो तभी जब कामनाओं से मुक्त होंगे। तो उसके लिए काम करो कि मैं कामनाओं से कैसे मुक्त होऊं।
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वीडियो: मैं कौन हूं ? कर्नाटक कलबुरगी में पुनः सत्संग 28 जून 2026 #योगी · 2026-06-29