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प्रश्नोत्तर P22-0016 · भाग 22

गुरु जी, मैंने 17 साल की उम्र में स्ट्रगल शुरू किया और सब कुछ पाया, फिर भी अब लाइफ बेकार लगने लगी है — अब क्या करूं?

अब करने से मुक्त हो जाओ — कर चुके। जिंदगी को जरूरत में जीना था। करना नहीं, जीना है। और जरूरत में करना करना नहीं होता, ध्यान रखना — जितनी शरीर की जरूरत है, शरीर के पोषण के लिए कुछ कर रहे हो तो वह करना करना नहीं है। करना तो तब होता है जब आपको योग्यता से ज्यादा चाहिए। पेट भर गया तो कोई तकलीफ नहीं; जैसे ही पेट से ज्यादा खाते हो, तकलीफ होना चालू हो जाता है — कभी जबरदस्ती पेट से ज्यादा खा लिया तो रात भर करवटें बदलीं, पचाने के लिए पाचन की दवाएं लीं। और यह शरीर उससे मिलने के लिए ही मिला है; बाकी अन्य जितने भी जीव हैं, वे भोग-भोजन करते हैं, कर्ता नहीं हैं, पैदा करके भी नहीं खाते — इस मानव तन का मकसद यही है।

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वीडियो: जिंदगी में दुख है तो जीना क्यों है ? #योगीजी_का_सत्संग · 2025-03-05