प्रश्नोत्तर P22-0017 · भाग 22
गुरु जी, आप कहते हैं एक हमारी जरूरत और एक सामने वाले की जरूरत — तो यह सामने वाला कौन है? कृपया समझाइए।
कोई भी — जीवन है तो कोई सामने रहेगा। कोई नहीं रहेंगे तो पेड़-पौधे रहेंगे, कोई तो जीव रहेगा, और चिल्ला के कहेगा कि मेरी जरूरत है। कभी पेड़ का चिल्लाना, पशुओं का चिल्लाना देख पाओ तो देखो — वह चिल्ला के कह रहा है कि मुझे तेरी जरूरत है; अब आप उसके काम आ रहे हो या नहीं। कबूतरों को दाना डालते हो, एक दिन बाहर चले गए, दाना नहीं डाला, तो पड़ोसी बताता है कि वे चिल्ला रहे थे — गुटर-गूं चालू। घर में पौधा लगाओ और दो दिन पानी ना डालो, देख लो, वह बता रहा है मेरी जरूरत है। तो कम से कम अब अपनी नहीं, उसकी जरूरत में जियो; ईमानदारी-सत्कर्म में लग जाओ। अपने लिए जी के थक गए ना? अब लोगों के लिए जीना चालू कर दो — धन से, तन से, ज्ञान से — जरूरतमंद के लिए। यही जीवन है।
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वीडियो: जिंदगी में दुख है तो जीना क्यों है ? #योगीजी_का_सत्संग · 2025-03-05