आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P22-0039 · भाग 22

गुरु जी, जैसे माता-पिता से जीव जन्म और गर्भ के साथ जुड़ा होता है और लंबे संसर्ग के कारण उन पर निर्भर रहता है, वैसे ही गुरु के सानिध्य में शिष्य जाता है — जो पहले से तृप्त और सिद्ध है उसके संपर्क में; क्या यह संपर्क भी उसी तरह निरंतर रहना आवश्यक है?

तब तक संपर्क रखना चाहिए जब तक आत्मिक कल्याण ना हो जाए। अगर आप यहां से निकले हो और वहां पहुंचना है, और यह मार्ग है — इसे बीच में ही छोड़ दिया तो पहुंच नहीं पाओगे; आपको आखिर तक जाना पड़ेगा, आखिर में वह छूट जाएगा। गुरु मार्ग है; लक्ष्य तक पहुंचने के बाद गुरु छूट जाता है। एक समय ऐसा आता है — एक कदम लक्ष्य पे और एक कदम मार्ग में; इधर से इधर उठाए तो फिर आ गए दुनिया में, और उधर उठाए तो मार्ग खत्म — एक कदम उठाते ही गुरु छूटा और आप अंदर हो गए।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: माया को सस्ती क्यों कर देती है ब्रह्म की मस्ती ? / #योगीजी_का_सत्संग · 2025-04-21