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प्रश्नोत्तर P22-0086 · भाग 22

गुरु जी, अगर ऑनलाइन किसी की कॉल आई, सेवा भाव भी है, लेकिन मन में शंका है और जांच-परख नहीं पा रहे — तो क्या मना कर दें? मना कर दिया और वह सच में जरूरतमंद हुआ तो भी पछतावा होगा।

एकदम देख लीजिए, बहुत सोच-समझ के करिए कि अंदर पछतावा न हो। बिना जांचे करेंगे तो कभी न कभी पछतावा खड़ा हो जाएगा; जांच कर आगे बढ़िए — आप किसी को ताकत दे रहे हैं, किसी को बल दे रहे हैं, उसे बलशाली बना रहे हैं। आपने मना किया क्योंकि मैं जांचूंगा तब करूंगा — इसमें पछतावा नहीं होना चाहिए। ऐसे तो आपको हजारों फोन आ जाएंगे; आप कोई ट्रस्ट तो हैं नहीं, आपका बैकग्राउंड उतना नहीं है कि सबको दे सको — हजारों के फोन आएं तो चाह के भी नहीं दे पाओगे। तो पछतावा नहीं होना चाहिए; जितना कर सकते हो करो, जितना हो जाए ठीक है। फोन पर सामने से कोई जरूरत बता रहा है, तो जब पूरी तरह लगे कि हां यह जरूरतमंद है, तभी देना — नहीं तो देने का पछतावा होगा।

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वीडियो: हम जरूरतमंद की पहचान कैसे करें ? || pahchan kaise kare jaruratmand || #livesatsang · 2025-04-20