प्रश्नोत्तर P22-0085 · भाग 22
गुरु जी, मैं दो-तीन ऑथेंटिक एनजीओ से जुड़ी हूं और हर महीने योगदान देती हूं, लेकिन पता नहीं कैसे मेरा नंबर दूसरे एनजीओ के पास चला गया — वहां से कॉल आती हैं कि बच्चे की हालत बहुत खराब है, जो हो सके दे दो। मुंबई, नासिक, उत्तराखंड से कॉल आती हैं, हम हैदराबाद से वहां जा नहीं पाते। अगर पैसे दान कर दिए और वे दुरुपयोग करें तो क्या उसका दोष हमें भी लगेगा?
एक बार आपको समय निकालना चाहिए — आप जिस ताकत को दे रहे हैं, उस ताकत का सदुपयोग हो रहा है या दुरुपयोग। मुंबई जाना पड़े तो कोई बात नहीं, घूमना भी हो जाएगा; बोल दो पता दीजिए, हम आएंगे। एकदम पता करके ही देना चाहिए। पता चलने के बाद भी दे रहे हो तो लगेगा; इसलिए जांच के देना चाहिए, चाहे जिस तरीके से — ऑनलाइन दे रहे हो तो ऑनलाइन चेक करिए: रजिस्टर्ड है या नहीं, क्या काम कर रहा है, उसका पूरा निकालिए; हो सके तो आप जाइए। समझ कर दीजिए, क्योंकि जब आप किसी को ताकतवर बना रहे हैं और गलत आदमी को ताकतवर बनाएंगे तो वह समाज में बुराइयां फैलाएगा। धन हो, तन हो या ज्ञान — उस व्यक्ति को दीजिए जो समाज हित में कार्य कर रहा हो, और उसके कार्य को देख लीजिए; ऐसा न हो कि ऊपर से कुछ और बता रहा है, अंदर से कुछ और कर रहा है। जीवन में इतना तो समय दीजिए, इतनी मानवता तो आप में भी होनी चाहिए। वेबसाइट पर तो वही दिखाएंगे जो वे दिखाना चाहते हैं; जिस स्थान पर सेवा होती है, वहां अनजान व्यक्ति बनकर चले जाइए — एकदम साधारण होकर, फटे कपड़े, टूटी चप्पल — और जितना समय है एक-दो दिन रुकिए, असलियत पता चल जाएगी। प्रभाव में मत जाइए — चश्मा, ब्रांडेड टीशर्ट, जूते, मोबाइल लेकर जाएंगे तो 'आइए सर, आइए' — सारी व्यवस्था बना के रखेंगे वे लोग। आपके आवरण का एक परसेंट भी प्रभाव न पड़े। फिर जांच के सहयोग देंगे तो देखिए कितना सुकून मिलेगा; अभी आप सेवा तो दे रहे हो, लेकिन एक संशय बना है।
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वीडियो: हम जरूरतमंद की पहचान कैसे करें ? || pahchan kaise kare jaruratmand || #livesatsang · 2025-04-20