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प्रश्नोत्तर P22-0115 · भाग 22

गुरु जी, आपने भोजन का पहला कौर उठाते ही याद आने पर हाथ धोकर पहले पिल्लों को खिचड़ी दी — वह कर्म था या सेवा? और लोग यह भी सिखाते हैं कि खाते समय उठना नहीं चाहिए।

मेरे लिए कुछ नहीं था, बस ऐसे ही। अगर मैं भोजन कर रहा हूं और आप मुझसे कुछ मांगें, तो मैं उठ जाऊंगा — मेरा अगला कौर देने के बाद ही जाएगा, आप मना करोगे तो भी। लोग सिखाते हैं खाते समय उठना नहीं चाहिए — वे जानें; मैं आपके लिए उठ रहा हूं। आपने एक गिलास पानी मांगा तो उठना मेरा कर्तव्य है। सर्वप्रथम मानवता होनी चाहिए; भोजन तो बाद में भी हो सकता है, उतना मेरे शरीर में है, अभी चल जाएगा। एक गिलास पानी देके मैं फिर बैठ जाऊंगा। मैंने सबसे पहले मानवता को देखा है और जरूरत को देखा है — अगर किसी के काम आ सकता हूं तो पहले काम आऊंगा; किसी को इंतजार करवाना मुझे अच्छा नहीं लगता, जितना जल्दी हो सके कर दूं कि आप खुश हो जाओ। जो कहता है भोजन करते वक्त उठना नहीं चाहिए, अगर निवाला डालते ही उसका बेटा तड़प के मरने लगे, तो क्या वह नहीं उठेगा? तुरंत उठेगा। ये सब बोलने में अच्छा लगता है; नियम ऐसा न बनाओ कि आपकी मानवता चली जाए — एक बार मानवता गई और दानवता आई, तो आप गिर जाओगे। दानव और पशु पहले खुद खाता है, बचा हुआ दूसरे को; पशुओं को चारा डाल दो तो मजबूत कमजोर को हटा के पहले खाएगा। मानव कहता है पहले तुम खाओ, बाद में मैं — मानव बांट के खाता है। यह गुण आप में है तो आप मानव हैं, नहीं तो दानव, और आपका जीवन पशुओं जैसा है।

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वीडियो: हम जरूरतमंद की पहचान कैसे करें ? || pahchan kaise kare jaruratmand || #livesatsang · 2025-04-20