प्रश्नोत्तर P22-0124 · भाग 22
गुरु जी, क्या हमारे अंदर जितनी अच्छाई है उतनी ही बुराई है? पिछले महीनों में मैंने समझा कि जैसे-जैसे समझ बढ़ती है, बुराई देखने की क्षमता भी बढ़ती जाती है — जो पहले नहीं दिखता था वह दिखने लगा, और लगता है कि अपने आसपास लिमिट्स, रेस्ट्रिक्शन डालने पड़ेंगे, नहीं तो लोग बर्बाद कर देंगे। अब एक चीज के दोनों पहलू दिखते हैं — तो क्या अच्छाई और बुराई दोनों मुझ में ही हैं? इस पर विस्तार करेंगे।
आपके अंदर ना तो अच्छाई है ना बुराई है — दोनों है ही नहीं। ये आपने धारण किया है — इच्छा और अपेक्षा। जब तक इच्छा-अपेक्षा है, तब तक आपके अंदर अच्छाई भी है और बुराई भी है, दोनों। और इच्छा-अपेक्षा से मुक्त हो गए तो आपके अंदर ना अच्छाई ना बुराई — सिर्फ आप। तो ये दोनों इच्छा और अपेक्षा की वजह से हैं, अच्छाई भी और बुराई भी।
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वीडियो: हमारे अंदर कितनी अच्छाई है उतनी ही बुराई है क्या ? #livesatsang #yogiji_ka_satsang · 2025-04-19