प्रश्नोत्तर P22-0125 · भाग 22
गुरु जी, पहले तो बुराई देख ही नहीं पा रहे थे; बिना बुराई को जाने अच्छाई धारण कैसे करें, कैसे पता चलेगा कि अच्छाई है? तो क्या बुराई का आना जरूरी था? जैसे बाजार में पहले दुकानदार पर भरोसा करके ले लेते थे, फटके खाने के बाद परखने की शक्ति डेवलप हुई और अब छांट-छांट कर ले पाती हूं।
आना जरूरी नहीं। अगर आप अच्छाई में जा रहे हो — अगर आपको सब्जी लेनी है तो आपने कहा "ये नहीं, ये दे दो" — तो आपको बुरा देखने की क्षमता है। पहले आपने बुरा ही देखा, क्योंकि अच्छे को लेना है, बुरे को छांटना है। तो आपकी नजर बुराई पे रहती है, क्योंकि बुराई से हमें बचना है, और अच्छाई हम धारण करते हैं। अगर खराबी क्या है ये पता नहीं होता तो आप छांटती कैसे? ये जांचने की क्षमता आपकी पहले से थी; आपने उस पे भरोसा किया, वह आपकी गलती है, वह अलग बात है। अब आपको समझ आ गया कि खुद पे ही भरोसा करना है — देख लो क्या करना है। आपके अंदर दोनों नहीं हैं — ना अच्छाई है ना बुराई है; सिर्फ तुम हो और आनंद है। बस ये लेन-देन में आता है।
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वीडियो: हमारे अंदर कितनी अच्छाई है उतनी ही बुराई है क्या ? #livesatsang #yogiji_ka_satsang · 2025-04-19